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सर्प-दंश
– बचाव के नुस्खे तथा प्राथमिक उपचार
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सर्प-दंश जान लेवा हो सकता है और ऎसा होने पर पीड़ित व्यक्ति का फौरन व उचित उपचार करना आवश्यक है। यह उन मौकों में से एक है जिनमें बचाव, उपचार से अधिक कारगर सिद्ध होता है। • जब आप बाहर खुले में हों तो अपना पैर या हाथ कहीं भी रखने से पहले उस स्थान को अच्छी तरह से जाँच लें। जो स्थान आपको ठीक से दिखाई न दे रहा हो, वहाँ अपना हाथ या पैर न रखें। यदि फ्लैश लाइट न हो तो कार्यस्थल पर उचित रौशनी सुनिश्चित करें तथा अंधेरा होने पर किसी ऎसे स्थान पर जहाँ ज्यादा चहलपहल न हो, पैदल चलने से पहले सुनिश्चित करें कि सुरक्षा उपकरण पहने गए हों।• सभी सांपों से सम्माननीय व्यवहार करें। उन्हें पकड़ने की कोशिश न करें, यह कार्य किसी दक्षता प्राप्त व्यक्ति, जिसे इस विषय का पूरा ज्ञान हो, के द्वारा ही किया जाना चाहिए। • किसी मरे हुए सांप से छेड़-छाड़ न करें। कई सांप मरे हुए होने का नाटक करते हैं और उन्हें छूने का प्रयास करने पर हमला बोल देते हैं। सर्प-दंश के लक्षण काटने वाले सांप की प्रजाति व विष की मात्रा के अनुरूप प्रत्येक सर्प-दंश के लक्षण आपस में नाटकीय रूप से भिन्न होते हैं। अधिकतर पाया गया है कि जहरीला सांप काटॆ गए स्थान पर दो दांतों के निशान छोड़ देता है। विभिन्न सांपों का विष विभिन्न प्रकार का होता है जिसके कारण पीड़ित व्यक्ति का व्यवहार प्रत्येक दंश में अलग-अलग पाया जाता है। कुछ तुरंत होने वाली प्रतिक्रियाएँ निम्न हैं: • तुरंत ही जलन के साथ दर्द होना व फिर सूजन आ जाना। • नींद आना, निगलने व साँस लेने में कठिनाई महसूस करना। • लार का मुँह से टपकना। • अधिक पसीने के कारण ह्रदय पर दबाव पड़ना व साँस लेने में कठिनाई होना। • संपूर्ण शरीर में दिखाई देने वाले लक्षणों में, जी मिचलाना, उल्टी होना, पेट में ऎंठन होना, जीभ का मोटा होना, बोलने व निगलने में कठिनाई, शरीर का सुन्न होना व सुईयों जैसी चुभन महसूस होना आदि हैं। • पीड़ित व्यक्ति को बेचैनी व चलने में परेशानी हो सकती है। सर्प-दंश या सर्प-दंश की शंका होने पर तुरंत उठाए जाने वाले कदम: प्राथमिक उपचार: ‘करें’ और ‘न करें’ करें : 1. काटे गए स्थान को साबुन व पानी से धोएं। 2. काटे गए स्थान को बिलकुल न हिलाएँ तथा उसे ह्रदय से नीचे ही रखें। 3. पीड़ित व्यक्ति को सांत्वना दें तथा ढ़ाढ़स बढ़ाएँ, डर व चिंता वेग को बढ़ा सकते हैं। 4. काटे गए स्थान से ऊपर एक चौड़ी पट्टी बाधें। पट्टी इस प्रकार बांधी जाने चाहिए कि रक्त प्रवाह नहीं रुके। एक अच्छा जड़ नियम यह है कि पट्टी को इतना ढ़ीला बाधें कि उसमें से एक उंगली आसानी से आ-जा सके। 5. पीड़ित व्यक्ति को तुरंत निकट के चिकित्सा केन्द्र ले जाएँ। न करें 1. काटे गए स्थान को ठंडा न करें तथा बर्फ इत्यादि का भी प्रयोग न करें। 2. Tourniquets (रक्त प्रवाह को रोकने के लिए उपयोग में लाया जाने वाला उपकरण) का उपयोग न करें क्योंकि ये रक्त प्रवाह को पूरी तरह से रोक देता है जिससे सांप द्वारा काटे गए अंग, के पूरी तरह बेकार होने की आशंका होती है। 3. घाव को काटें या छीलें नहीं। जितना जल्दी पीड़ित व्यक्ति को दक्ष चिकित्सकीय उपचार मिलेगा, उतना ही किसी भी तरह की जटिलता के आसार कम होंगे। सांप को खोजने में समय नष्ट न करें। चूंकि प्राय: सर्प-दंश में काटे गए सांप के इतिहास का पता नहीं चलता और इसलिए सर्प-विषनाशक औषधियाँ सभी प्रकार के सर्प-विषों से लड़ने के लिए बनाई जाती हैं। हिंदी अनुवादक: प्रदीप त्यागी, जामनगर, भारत अनुवाद तिथि : 27-10-2004 |
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