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कार्यालय-प्रपंचों में विजय प्राप्ती के लिए नौ नीतियाँ
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कार्यालय-प्रपंचों द्वारा कार्यस्थल पर काली छाया पड़ सकती हैं, लेकिन कोई कंपनी कितनी ही बड़ी या छोटी क्यों न हो, यह कार्यालय-प्रपंच सभी के लिए एक टाला न जा सकने वाला सत्य है। हममें से अधिकांश यह विश्वास करना चाहते हैं कि हमें अपने कार्य में अग्रणी बनने के लिए प्रपंचों का खेल खेलने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। परंतु सच्चाई यह है कि प्रत्येक व्यापारिक निर्णय के विस्तृत पहलू होते हैं, जिनके द्वारा एक सफल व्यापारी इस खेल को खेलने के गुर सीखता है। यदि आप अभी तक कार्यालय-प्रपंचों की कला में निपुणता हासिल नहीं कर पाए हैं तो भी अभी देर नहीं हुई है। यहाँ नौ नियम दिए जा रहे हैं, जो कि आपको कार्यालय में अपने सम्मान की रक्षा करते हुए इन प्रपंचों को रचने व खेलने में सहायता प्रदान करेंगे।
1. नेक खेल:
हम सभी ने सुना है कि नेक व्यक्ति सदैव फिसडडी रहते हैं लेकिन व्यापार जगत के संदर्भ में ऎसा नहीं है। कार्यस्थल पर शत्रु न बनाना सदैव लाभप्रद रहता है। यदि आपका स्वभाव सकारात्मक है तथा आप अपने सहकर्मियों से सौहार्द्य बना कर रखते हैं तो दूसरे व्यक्ति आपकी इन खूबियों को ध्यान में रखते हैं। आप नहीं जानते कि आप के पड़ोस में बैठे उस वाचाल पुरुष, जिसे आप चुप कराने के लिए उतावले हुए जा रहे हों, की घनिष्ठता किस-किस से है। कभी भी किसी उच्च पदाधिकारी जैसे वरिष्ठ उपाध्यक्ष आदि, के परिचित को नाराज़ करने का दुस्साहस न करें।

2. “स्वर्णिम निति” को याद करें:
याद करें, जब आपकी माता ने आपसे “दूसरों के लिए कार्य करने” को कहा था ? कार्यालय-प्रपंच भी सिर्फ संबंधों का निर्माण करना मात्र ही तो है, इसलिए अवश्यकता पड़ने पर सहायता के लिए अपना हाथ अवश्य बढ़ाएँ । समय पड़ने पर दूसरों को मदद अवश्य करें। किसी दूसरे की परियोजना को पूरा करने के लिए देर तक रुक कर भी मदद करें तथा किसी के प्रश्नों के उत्तर देने के लिए समय निकालें। ऎसा करने से आपकी ख्याति एक संगठन में कार्य करने वाले व्यक्ति के रूप में होने लगेगी तथा ये सभी कार्य यह सुनिश्चित करेंगे कि आपको भी जरूरत पड़ने पर सभी से आवश्यकतानुसार सहयोग मिलेगा।

3. एक मार्ग-दर्शक चुनें:
उच्च पदों पर कार्यरत लोगों से मित्रता सदैव काम आती है, इसलिए अपनी कंपनी के किसी ऎसे व्यक्ति को अपने मार्ग-दर्शक के रूप में चुनें, जिसका संगठन के अंदर काफी अच्छा प्रभाव हो और इस व्यक्ति विशेष को समय- समय पर भोजन पर आमंत्रित करें। अधिकांश व्यक्ति चाहते हैं कि उनके अहम को ठेस न पहुंचे तथा यह जान कर उन्हें अच्छा लगता है कि आप उनकी इन भावनाओं का ध्यान रखते हैं। आप अपने मार्ग-दर्शक से बहुत कुछ सीख सकते हैं और यह सुनिश्चित करना कभी भी हानिकारक नहीं होता कि आपकी कंपनी का कोई उच्च पदाधिकारी आपको आपके नाम से जानता है। फिर भी, अपने मार्ग-दर्शक का चुनाव आप सावधानी पूर्वक करें। किसी भी बुरी प्रतिष्ठा वाले व्यक्ति से अपने आप को न जोड़ें।

4. सबकी नज़रों में आएँ :
आपको अपना सारा खाली समय अपने कार्यों में ही नहीं लगा देना चाहिए, अपने कार्यालय के सामाजिक आयोजनो में शामिल होना भी काफी काम आता है। कार्यालय सभाओं में आपको अपने सहकर्मियों को हल्के व आराम के वातावरण में जानने व समझने का अवसर मिलता है। इसलिए चाहे आप शाम को थक कर कितना ही चूर क्यों न हो गए हों, लोगों से मिलने व कार्यालय डिनर इत्यादि में यदा-कदा जाने के लिए अवश्य समय निकलें। व्यक्तिगत रूप में सबसे मिलने-मिलाने में दिया गया समय जरूर फायदा पहुँचाएगा।

5. दिखावा करें, पर अत्यधिक नहीं:
कार्यस्थल पर सफल होना एक बात है और आपके वरिष्ठ अधिकारियों का आपकी सफलताओं से अवगत होना दूसरी बात है। जितना ज्यादा आप अपने आपको प्रस्तुत करेंगे तथा लोगों को अपनी योग्यताओं से अवगत कराएँगे उतने ही आपके खुद को स्थापित करने, पदोन्नति व ईनाम इत्यादि के लिए चुने जाने के अवसर प्रबल होंगे। यह सुनिश्चित करने के लिए कि आपके प्रबंधक को इस बात की पूरी जानकारी हो कि आप कौन हैं, क्या कार्य करते हैं व आपके द्वारा कब सफलता प्राप्त की गई थी, आप जो भी कार्य कर सकें, करें। अर्थात, बैठकों (मीटिंगों) में अपना पक्ष रखें व विषय संबंधी अच्छे प्रश्न पूछें और फिर एक बड़े ही कठिन सत्र के तुरंत बाद संबंधित व्यक्ति को फॉलोअप ई-मेल भेजें इत्यादि। दूसरों की नजरों में पहचान बनाने व दूसरों का मात्र ध्यान चाहने में सिर्फ थोड़ा ही अंतर है, इसलिए अपनी पहचान बनाने के अवसर को चतुराई से चुनें।

6. अफवाहों से बचें:
किसी भी रसीले वार्तालाप में शामिल होने की इच्छा उतावलापन पैदा कर सकती है, लेकिन इस इच्छा को दबाना लंबे समय में सहायक सिद्ध होगा। कार्यालय की गप्पों में अत्यधिक लिप्त होने पर आप पाएँगे कि एक दिन आप स्वयं भी किसी ऎसी ही गप्प का विषय या हास्यपात्र बन चुके हैं। इअसलिए जब भी आप की जिव्हा किसी मुँह में पानी लाने वाले चटपटे वार्तालाप की ओर आकर्षित हो, इसे नियंत्रित करने के लिए ज़ोर से काटें।

7. संचार के गुर सीखें:
कई कार्यालय विविध व्यक्तित्वों वाले समाज का एक सूक्ष्म सांसारिक रूप प्रस्तुत करते हैं। लोग अपने कार्यस्थल पर अपने से विपरीत व्यक्तित्व वाले लोगों के सामने अपनी बात रखने व कहने को सबसे बड़ी चुनौती मानते हैं। ऎसे में आपको चाहिए कि आप विभिन्न प्रकार के व्यक्तित्वों के बारे में जाने व समझें कि उनमें से प्रत्येक के साथ आप अपने विचारों का आदान प्रदान कैसे कर सकते हैं।

8. अपने बॉस की छवि सुन्दर बनाएँ:
आगे बढ़ने का सबसे उत्तम तरीका है कि आप अपने बॉस के नाम को महिमा मंडित करने के लिए जो कुछ भी कर सकते हैं, करें। यदि आप अपने प्रबंधक की सफलता में सहायक होंगे तो उसकी उस सफलता के आप तक पहुँचने के अवसर भी उतने ही प्रबल होंगे।

9. लोगों से बातें करें:
आज के व्यापारिक जगत में, तकनीकी उन्नति के कारण आपको अपनी डेस्क छोड़ने की आवश्यकता नहीं पड़ती। आप दिन में अपने कार्यालय में बैठे हुए भी वॉइस-मेल, ई-मेल व अंतर कार्यालय-मेल आदि की मदद से अपने सभी कार्यों को पूरा कर सकते हैं। परंतु व्यक्तिगत वार्तालाप अब भी बहुमूल्य है। आप थोड़े समय के लिए ई-मेलों का सहारा छोड़ कर अपने कार्यालय के लोगों से व्यक्तिगत तौर पर मिलें। आपका यह व्यक्तिगत वार्तालाप आपको बहुमूल्य व्यवसायिक संबंधों को बनाने में आपकी सहायता करेगा।

लेखिका : केट लारेंज़

हिंदी अनुवादक: प्रदीप त्यागी, जामनगर, भारत

अनुवाद तिथि : 26-10-2004

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