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पॄष्ट |
3.
स्वंय में विश्वास करें
आप अपनी एक ऐसी तस्वीर बनायें, जिसमें आप सफ़ल दिखें,
जिसमें आप हर कार्य में सफ़लता पाते हुए दिखायें दें, जिसमें आप बहुत
शानदार और महान दिखें, जिसमें आपके पास पैसे की कोई कमी ना हो, जिसमें
आपकी समाज में इज्जत हो, जिसमें आप पूर्ण स्वस्थ हो । शीशे के आगे, दुनिया
के सफ़ल और प्रसिद्ध व्यक्तियों की तस्वीर चिपकायें और कहें कि हम भी इनकी
तरह है । ध्यान रहें कि ये तस्वीर कभी फ़ीकी ना पड़ें ।
जब कभी कोई भी नकारात्मक विचार आयें तब जानबूझकर ठीक उसका
उल्टा मन में लगातार बोलें जिससे कि नकारात्मक विचार खत्म हो जायें ।
अपने मन में लगातार कहते
रहे! कहते रहे! कहते रहे!
आप अपने उद्वेश्य की पूर्त्ति के लिए ज्वलन्त इच्छा रखें । अपने मन में
कहें कि मै प्रत्येक वह कार्य कर सकता हूँ जो मै चाहता हूँ । अगर
धीमे-धीमे कहने से नकारात्मक विचार ना जायें तो चिल्ला कर कहें कि ये काम
हो जायेगा क्योंकि मै ईश्वर का बेटा हूँ/बेटी हूँ । अपनी कल्पना में कोई
रुकावट न पैदा करें । कोई भी निराशा के भाव न लायें । दिन
में दस बार कहें:
मेरी अच्छाई
की ओर जाओ । मेरे अच्छे से मिलो । यदि ईश्वर मेरे लिए है
तो मेरे खिलाफ़ कौन हो सकता है ?
अपनी योग्यता का एक सही अनुमान बनायें और फ़िर इसको १०% बढ़ाने की कोशिश
करें । ज्यों-ज्यों आपका विकास होता जाए, त्यों-त्यों अपनी इज्जत करना
सीखें व अहंकार मन में न लायें । जिनमें अहंकार होता है वो झूठा दिखावा
दिखाते है, जो ज्ञान से परिपूर्ण होते है, वे विनम्र होते है ।
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