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व डेस्कटॉप दोनों के लिए
उपयोग-में-सहज एक मित्रवत लिनक्स संचालन तंत्र, जो कि सम्पूर्ण विश्व में
अनेकों भाषाओं में उपलब्ध है ।
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| मैनड्रैकलिनक्स द्वारा 'लिनक्स में हिन्दी, हिन्दी में लिनक्स' के उपयोग के अनुभवों को साझा करने हेतु कटिबद्ध एक वेब-स्थल | |
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|| जीने की कला - अपनी चिंताओं से कैसे मुक्त हो ? || | आगे |
| मुख्य पॄष्ट |
7. अपनी चिंताओं से कैसे मुक्त हो ?चिन्ताएँ आती कहाँ से है ? यदि आपका जीवन नकारात्मक
विचाराधीन है तभी आपके अन्दर चिन्ताएँ आएगी ।
Do right and fear no man.
जब आपके दिमाग में चिंता हो तब ये सोचें किDo not write and fear no woman. ईश्वर अभी इसी समय मेरे मन को साहस से,
शान्ति से तथा शांत आश्वासन से भर रहा है ।
अपनी सभी समस्याऐं और अपनी सभी चिंताओं को ईश्वर के ऊपर छोड़ दे और अपने मन में कहें:- "ईश्वर मेरे साथ है,
ईश्वर सदा मेरी रक्षा करता है और ईश्वर मुझे कभी भी अकेला छोड़ कर नहीं जायेगा और जब मेरे साथ ईश्वर है, तो मुझे कोई चिंता नहीं है ।" जैसा हम लोगों ने जाना कि नकारात्मक विचार से चिंता पैदा होती है, साथ-२ हम ये समझे कि जैसे हमारे विचार होगें वैसा ही हमारा भाग्य बन जायेगा । इसलिए हमको सकारात्मक विचार करने चाहिए । अभ्यास के लिए २४ घंटे के लिए, हम अपने बारे में, अपने घर वालों के बारे में, अपने बच्चों के बारे में और अपनी परिस्थितियों के बारे में आशावादी विचार रखें, आशावादी बोलें और आशावादी विश्वास रखें । अगर हम एक दिन सफ़ल रहे तो दूसरे दिन भी जारी रखें । नहीं तो दो-तीन दिन का अन्तर देकर फ़िर से अभ्यास करें । अपने मित्रों की सूची बनायें जो कि सकारात्मक विचारधारा रखते हो तथा आशावादी है । उन्हीं के साथ अपना अधिकतर समय व्यतीत करें । कभी किसी से बहस न करें । बहस से अधिक नकारात्मक विचारधारा जन्म लेती है । जैसे ही कोई नकारात्मक विचारधारा आयें, तभी तुरन्त ही उसका विपरीत सकारात्मक विचार कहें और सोचें । यदि आपको स्वंय में और अपने ईश्वर में
विश्वास है
तो आपको कोई भय और चिंता करने की आवश्यकता नहीं है ।
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