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5. हीन-भावना से कैसे बचें?पीछे ||  जीने की कला - दिल दुखने की भावना पर विजय कैसे पायें ? || आगे7. अपनी चिंताओं से कैसे मुक्त हो ?
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6. दिल दुखने की भावना पर विजय कैसे पायें ?

जब हमारा दिल दुखता है तो हमें गुस्सा आता है । हमारा दिल तब दुखता है जब हमारे मन का कोई काम नहीं होता है । जब हमको गुस्सा आता है तो हमारे अन्दर Adorlin बनती है । Carbohydrates के साथ मिलकर, ये Adorlin एक Cortogon नामक विष का निर्माण करता है तथा Protin (प्रोटीन) के साथ मिलकर Hydrocortogon बनता है । इससे कैंसर तक हो सकता है । अतः अपनी रक्षा के लिए हमें अपना दिल नहीं दुखाना चाहिए ।

अगर हमारा दिल दुःख जायें तो हम गुस्सा न करें । अपने स्वास्थ के लिए, दूसरों को माफ़ करें क्योंकि अनुसन्धानों से पता चला है कि ७०% बीमार वो है जिनके मन में गुस्से की या पीड़ा की भावना या बदला लेने की इच्छा है । अगर आप गुस्सा नहीं करते है तथा जिसके ऊपर आप गुस्सा कर रहे है, उसको माफ़ करते है, तब आप अपने पर अहसान करते है, उस पर नहीं ।

जब कोई किसी का दिल दुखाता है और उसका दिल दुख जाता है तो उसका तो काम पूरा हो जाता है, इसलिए आप गुस्से में मत आइये, इससे सामने वाले का दिल दुख जायेगा । दूसरा अपना गुस्सा निकाल रहा है, मतलब अपनी भावनाओं को मार रहा (Affection decease) है, इससे बचने के लिए आप भूल (forgive) जाएँ । जब आप उसको माफ़ करेगें तो आप अपनी रक्षा करेगें ।

अपने ह्रदय पर आत्मिक आयोडीन लगायें ।
आप इसके (दिल दुखने) बारे में भूल जायेगें ॥
  • अगर आप अपने जीवन में भला चाहते है तो अपना दिल ना दुखायें । अगर किसी ने तुम्हारा दिल बहुत दुखाया है तो उसको गालियों भरा खत लिखो । उसे रात में अपनी तकिया के नीचे रक्खो । सुबह उठकर उसे पढ़ो, जिस दिन उसको पढ़कर आपको हंसी आ जायें, उसी दिन उसको फ़ाड़ दो ।

  • आप छड़ी लेकर किसी तकिया या गद्दे को खूब पीटें ।

  • जिसने आपका दिल दुखाया है, उसके लिए ईश्वर से प्राथना करें कि उसे, "हे भगवान ! शान्ति दो ! शान्ति दो ! शान्ति दो !" क्योंकि जब उसके मन में अशान्ति है तभी तो उसके मन में दूसरे का दिल दुखाने का ख्याल आया है ।

  • जिस समय आपको गुस्सा आये, उस समय अपनी मुठ्ठी खोल लें और उसे बन्द न करें ।

  • जब आपको बहुत जोरों से गुस्सा आ रहा हो तो सोचें कि आपको गुस्सा करने से क्या मिलेगा?

जब हम छोटी-२ बातों से चिढ़ते रहते है तो ये छोटी-२ बातें मिलकर गुस्से को जन्म देती है । जब भी आपको जरा सा भी गुस्सा आयें, तब आप उसे भूलायें मत और सोचें कि क्या ये गुस्सा करने लायक बात है ?

अपने मन से पूछो कि गुस्सा करके आप अपना मानसिक व शारीरिक स्वास्थ को खतरे में डालना पसन्द करेगें । जब आप गुस्सा करते है तब टिशुज़ जलते है तथा इनके जलने से Co2 बनती है, इसलिए इसको दूर करने के लिए खूब गहरी-२ साँस लें । ये अधिक महत्तवपूर्ण है कि आपका दिल नहीं दुखना चाहिए । शुभकामना-संदेश भेजते समय, आप उत्तर की आशा न करें ।

कोई भी दुनिया में तुमसे न लड़ पायें । ये सबसे अधिक महत्तवपूर्ण है । स्वंय का विश्लेषण करें । अगर आप मीठे नहीं रहेगें तो लोग आपकी मदद या आपका कोई काम नहीं करेगें तथा आपका दिल दुखायेगें । ये देखो कि आपके छत्ते में शहद है कि नहीं । अगर आपके छत्ते में शहद है तो आप कितना ही डंक मारिये, फ़िर भी लोग आपके पास आयेगें ।

यदि आप अपने अन्दर कोई कमी पाओ तो अपने इष्ट देवता से कहो कि जब तुम मेरे कण-कण में व्याप्त हो और तुम्हारे अन्दर कोई कमजोरी नहीं है, तब मेरे अन्दर से इन कमजोरियों को हटा कर, मेरा नया जन्म करो, जिससे मै आपके समान व्यवहार करने में सक्षम हूँ ।


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